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Sunday, January 11, 2026

अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

अनधिकृत पुस्तकों पर यूपी बोर्ड हुआ सख्त, विद्यालयों में जांचेगा बस्ते, जुर्माना और सजा के प्रावधान सहित विद्यालय की मान्यता तक वापस लेने की कार्यवाही की तैयारी

कक्षा नौ से 12 तक की पुस्तकें छापने के लिए अधिकृत हैं तीन मुद्रक

फरवरी में बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र की पुस्तकें

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र के लिए कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्यपुस्तकें फरवरी में बाजार में उपलब्ध कराने की योजना सुनिश्चित की है। पुस्तकें समय से पहले उपलब्ध कराने के साथ बोर्ड यह भी सुनिश्चित कराएगा कि विद्यार्थियों के बस्ते में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें न पहुंचें। अप्रैल से विद्यालय खुलने पर हर जिले में कुछ विद्यालयों में छात्र छात्राओं के बस्ते की रेंडम जांच जिला विद्यालय निरीक्षकों की टीम से इस उद्देश्य से कराई जाएगी कि विद्यालयों में अनधिकृत पुस्तकें तो नहीं थोपी गई हैं। अनधिकृत पाठ्यपुस्तक मिलने पर संलिप्त लोगों पर जुर्माना और सजा का प्रविधान है तथा संबंधित विद्यालय की मान्यता तक वापस ली जा सकती है।

बीते वर्षों में शैक्षिक सत्र शुरू होने के दो से तीन महीने बाद बोर्ड की अधिकृत पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हो पाती थीं। इस देरी का फायदा उठाकर अनधिकृत विक्रेता एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित डुप्लीकेट और महंगी पुस्तकें बाजार में बेचते थे, जिन्हें कई विद्यालयों में छात्रों को खरीदने के लिए मजबूर भी किया जाता था। समय पर किताबें उपलब्ध न होने के कारण बोर्ड भी इस पर प्रभावी रोक नहीं लगा पाता था, लेकिन इस बार अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर नियंत्रण के लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने ठोस तैयारी की है। 

इसी कारण हर जिले में पुस्तक विक्रेताओं की दुकान का नाम, पता व मोबाइल फोन नंबर अभी से जारी कर दिया गया है, जहां अधिकृत मुद्रक पाठ्यपुस्तकों को फरवरी के प्रथम सप्ताह में उपलब्ध कराएंगे। ऐसे में यह तर्क पहले ही खत्म कर दिया गया है कि अधिकृत पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। फरवरी में ही पुस्तकें उपलब्ध हो जाने पर विद्यार्थियों/अभिभावकों को सत्र शुरू होने के पहले ही पाठ्यपुस्तकें खरीदने का अवसर मिल जाएगा। 

इस तरह शैक्षिक सत्र 2026-2027 में जब विद्यालय खुलेंगे तो छात्र-छात्राएं बस्तों में अधिकृत पुस्तकों के साथ आएंगे। ऐसे में बस्तों की रेंडम जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके पास केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकें हैं। बोर्ड सचिव का मानना है कि इससे जहां अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर रोक लगेगी, वहीं पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और एकरूपता भी बनी रहेगी। अभिभावकों को आर्थिक शोषण से भी मुक्ति मिलेगी।



यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें, डुप्लीकेसी पर जेल, माध्यमिक शिक्षा परिषद के पास रहेगा पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट 

अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

मुद्रकों और विक्रेताओं की जिलेवार जारी की गई सूची


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर अनधिकृत और महंगी पाठ्य पुस्तकों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। परिषद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा छात्रों को अनधिकृत या अधिक मूल्य वाली पुस्तकों को खरीदने अथवा पढ़ने के लिए बाध्य किया गया तो उस संस्था पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही मान्यता निलंबन या पूरी तरह समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा नौ से 12 तक कुल 34 विषयों के अंतर्गत 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों को सस्ते दर पर प्रचलन में लाया गया था। इन पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रक-वितरकों को अधिकृत किया है। 

परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान एवं इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान सहित कुल 36 विषयों  की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए अनिवार्य की गई है।

इसके अलावा परिषद द्वारा विकसित कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकों को भी सस्ते दर पर छात्रों के अध्ययन हेतु लागू किया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों में केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्य पुस्तकों को ही पढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य पाठ्य पुस्तक को प्रचलन में लाने की अनुमति नहीं होगी।

सचिव भगवती सिंह ने कहा कि निर्देशों का उल्लंघन इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संस्था पर पांच लाख रुपये का जुर्माना, निर्धारित अवधि के लिए मान्यता निलंबन अथवा पूरी तरह से समाप्त की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्य पुस्तकों की डुप्लीकेसी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए तीन वितरकों को अधिकृत किया गया है। इनमें आगरा, झांसी और लखनऊ के वितरक शामिल हैं।





यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें

प्रयागराजः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की पाठ्यपुस्तकें फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। पिछले कुछ वर्षों में यह पहली बार होगा कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकें फरवरी में ही उपलब्ध हो जाने पर अनधिकृत और महंगी पुस्तकों का विक्रय कर छात्र छात्राओं/अभिभावकों की जेब काटने का खेल बंद हो जाएगा। इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में केवल परिषद द्वारा अधिकृत एनसीईआरटी एवं परिषद की पाठ्यपुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। डुप्लीकेसी पाए जाने पर जेल और जुर्माना होगा।

बोर्ड सचिव के अनुसार, सभी पाठ्यपुस्तकों का कापीराइट परिषद के पास रहेगा। पुस्तकों की पाइरेसी डुप्लीकेसी पाए जाने पर संबंधित मुद्रक, विक्रेता अथवा व्यक्ति के खिलाफ कापीराइट अधिनियम-1957 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें छह माह से तीन वर्ष तक की सजा और 50 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। हाईस्कूल के कक्षा नौ व 10 की अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान तथा इंटरमीडिएट के कक्षा 11 व 12 की अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान विषय सहित कुल 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित होने के साथ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध होंगी। 

इसके अतिरिक्त परिषद द्वारा विकसित की गई हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की कक्षा नौ से 12 तक की 12 पाठ्यपुस्तकें भी लागू होंगी। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा को कक्षा नौ व 12, मेसर्स पीतांबरा बुक्स प्रा.लि. बिजौली, झांसी को कक्षा 10 तथा व मेसर्स सिंघल एजेंसीज लखनऊ को कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तकों के लिए अधिकृत किया गया है। इन तीन वे मुद्रकों के अलावा किसी अन्य की वे पुस्तकें मान्य नहीं होंगी। सूची भी जारी की गई है कि किस जिले में किस पुस्तक विक्रेता के यहां अधिकृत न पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी। डीआओएस व इसी अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित व कराएंगे। 

सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय अधिक मूल्य व की किताबें, अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें, गाइड बुक या अन्य सामग्री खरीदने के लिए छात्र-छात्राओं को बाध्य करेगा तो नियमों के उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना, मान्यता का निलंबन अथवा मान्यता वापसी तक की कार्रवाई संभव है। 

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