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Monday, January 5, 2026

यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय

यूपी बोर्ड के कैलेंडर में निर्देश आदर्शों भरे, हकीकत में पूछ नहीं, वर्षभर गैर शैक्षणिक के बोझ से शैक्षिक पंचांग का पीछे छूटना तय



प्रयागराज, यूपी बोर्ड से जुड़े कक्षा नौ से 12 तक के 29 हजार से अधिक स्कूलों के लिए हर साल जारी होने वाले शैक्षणिक कैलेंडर में निर्देश तो आदशों से भरे होते हैं लेकिन हकीकत में बहुत कम निर्देशों का अनुपालन ही होता है। 


उदाहरण के तौर पर 2025-26 सत्र के लिए जारी कैलेंडर में विद्यार्थियों को करियर के प्रति जागरूक करने के लिए प्रत्येक स्कूल में महीने में दो बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, बैंक के अधिकारी, सेवायोजन अधिकारी, न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारी, उद्यमियों एवं अन्य प्रतिष्ठित महानुभावों को सम्बोधित करने आमंत्रित करने की सलाह दी गई थी। ये अलग बात है कि पूरे प्रदेश में इक्का-दुक्का स्कूल ही होगा जहां करियर गाइडेंस संबंधित नियमित सत्र आयोजित किए गए हों। 


इसी प्रकार यूपी बोर्ड के पूर्व सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने 'नए सत्र में नया सवेरा' कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत अप्रैल के प्रत्येक सप्ताह में दो दिन शिक्षाधिकारियों को विद्यालयों की प्रातःकालीन सभाओं में विद्यार्थियों से जीवन मूल्यों, अनुशासन, करियर, नियमित दिनचर्या आदि प्रासंगिक विषयों पर प्रेरक संवाद करने को कहा गया था। इस कार्यक्रम में यथासंभव विद्यालयों के पुरा छात्रों एवं विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों को भी आमंत्रित करने की बात कही गई थी। हालांकि यह निर्देश भी सिर्फ कैलेंडर तक सीमित रह गया। 

हैंड्स ऑन एक्टीविटीज एवं एक्सपीरिएन्शियल लर्निंग विधा को गणित एवं विज्ञान विषय के शिक्षण में शामिल करने की बात हो या विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनका स्वास्थ्य कार्ड बनवाना हो या फिर लैंगिक समानता पर विद्यार्थियों के बीच परिचर्चा, इन सभी निर्देशों की हकीकत में किसी स्कूल में पूछ नहीं है। 


माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी कहते हैं कि वर्षभर सरकार और विभाग की ओर से प्रधानाचार्य और शिक्षकों को दूसरे इतने काम सौंपे जा रहे हैं कि शैक्षिक पंचांग को पीछे छूटना ही है। दूसरा अफसरों की ओर से बनाया जा रहा शैक्षिक पंचांग कई पहलुओं से अव्यावहारिक है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय विविधता और स्वायत्तता को नष्ट कर रहा है।

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