जिला परियोजना कार्यालय एवं ब्लॉक रिसोर्स सेंटर पर खाली पड़े पद बेसिक शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहे
04 हजार से अधिक पद डीपीओ और बीआरसी पर सृजित
लखनऊ। डीपीओ (जिला परियोजना कार्यालय) एवं बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) के खाली पड़े पद प्राइमरी शिक्षकों के काम के अतिरिक्त बोझ को और बढ़ा रहा है। नतीजा, शिक्षक संगठन अब शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे जाने के साथ-साथ डीपीओ एवं बीआरसी के भी रिक्त पदों को भरने की मांग करने लगे हैं। सबसे खराब स्थिति बहराइच जिले की है, जहां के डीपीओ में 13 पद सृजित है जबकि सभी बीआरसी को मिलाकर कुल 60 पद सृजित हैं।
इस प्रकार से इस जिले की दोनों संस्थाओं में कुल 73 सृजित पदों में से मात्र 4 पद ही भरे हुए हैं, शेष सभी खाली हैं। यही स्थिति ज्यादातर जिलों की हैं।
सृजित पदों में से आधे से अधिक रिक्त पड़े
प्रदेश में डीपीओ और बीआरसी पर कुल मिलाकर स्वीकृत पदों की संख्या 4,279 है, जिनमें से आधे से अधिक पद रिक्त हैं। बीते पांच वर्षों के दौरान प्राइमरी स्कूलों में जिस प्रकार से अलग अलग क्षेत्रों के ऑनलाइन कार्यों में बढ़ोत्तरी हुई है, उसमें सहयोग के लिए डीपीओ और बीआरसी की स्थापना की गईहै, जिसके लिए दोनों स्तरों पर पर्याप्त संख्या में पदों का सृजन किया गया है।
कर्मचारियों के अभाव में यह कार्य शिक्षकों व प्रधानाचार्यों को करना पड़ता है। नतीजा, कार्यदिवसों में शिक्षकों का काफी समय शिक्षण कार्य की जगह डाटा फिडिंग में व्यतीत हो जाता है।
10 शीर्ष जिलों के डीपीओ एवं बीआरसी पर रिक्त पद
(एक डीपीओ पर सृजित पदों की संख्या 13 है जबकि एक बीआरसी पर सृजित पदों की संख्या 4)
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