ARP के चयन में कई जिले पिछड़े, शैक्षिक गुणवत्ता हो रही प्रभावित, देखें चयन में सबसे अच्छे और फिसड्डी जिलों के नाम
शिक्षकों को सहयोग और निपुण भारत मिशन को गति देने पर भी असर
लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में पद खाली
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों को सहयोग और निपुण भारत मिशन को गति देने के उद्देश्य से एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) का चयन किया जाता है। यह चयन शिक्षकों के बीच से ही परीक्षा के माध्यम से होता है। हालांकि, इस वर्ष आधा सत्र बीत जाने के बावजूद कई जिलों में एआरपी के पद खाली हैं, जिससे शैक्षिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर जैसे एक दर्जन से अधिक जिलों में 40 फीसदी से अधिक एआरपी के पद खाली हैं। इससे विद्यालयों का पर्यवेक्षण और उनमें सुधार के कार्य बाधित हो रहे हैं। एआरपी के माध्यम से प्रेरणा एप से होने वाली निगरानी, शिक्षक-शिक्षण सामग्री के प्रदर्शन, दीक्षा एप का प्रचार-प्रसार और बच्चों को उपचारात्मक शिक्षण देने जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इसके अतिरिक्त शिक्षकों को शिक्षण विधियों में मदद करना, उनकी समस्याओं का समाधान, लर्निंग गैप को पूरा करना, डिजिटल संसाधनों का प्रचार, अभिभावकों व स्कूल प्रबंधन समितियों से सुझाव लेना, शैक्षिक वीडियो बनाना, कार्यशालाएं आयोजित करना व प्रशिक्षण देना भी इन रिक्तियों के कारण प्रभावित हो रहा है।
चयन में दस अच्छे जिले
कुछ जिलों ने एआरपी चयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। गौतमबुद्धनगर और कौशांबी में शत-प्रतिशत पद भरे हुए हैं। वहीं, बस्ती (95%), सिद्धार्थनगर (94%), बाराबंकी (93%), गाजियाबाद (92%), रामपुर और वाराणसी (91%), अंबेडकरनगर और फतेहपुर (90-90%) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में पद भरे गए हैं। बांदा, बागपत, उन्नाव, औरैया और देवरिया में भी एआरपी भ्रमण की स्थिति बेहतर पाई गई है।
चयन में खराब दस जिले
इसके विपरीत, कई जिले चयन में पिछड़ गए हैं। मथुरा में 62 फीसदी, हरदोई में 59 फीसदी, कासगंज में 57 फीसदी, मऊ में 52 फीसदी, गोंडा में 49 फीसदी, मेरठ में 48 फीसदी, बरेली में 45 फीसदी, तथा लखनऊ, गोरखपुर और हमीरपुर में 43 फीसदी एआरपी पद अभी भी खाली हैं। कानपुर, हापुड़ और फर्रुखाबाद में भी एआरपी भ्रमण की स्थिति अपेक्षाकृत खराब मिली है।
अपर मुख्य सचिव ने जताई थी नाराजगी
हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने 10 फरवरी तक एआरपी चयन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उन्होंने शिक्षकों को एआरपी चयन के लिए अधिक से अधिक आवेदन करने हेतु प्रोत्साहित करने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर को सम्मानित करने पर भी जोर दिया।
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