विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन देने का हाईकोर्ट का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित पुत्री को पारिवारिक पेंशन नहीं देने का बीएसए फर्रुखाबाद का आदेश रद्द कर दिया है। साथ ही याची को पारिवारिक पेंशन देने पर निर्णय लेने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराधा अहिरवार की याचिका पर दिया है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय फ़र्रुखाबाद में प्रधानाध्यापिका पद पर कार्यरत याची की मां दुर्गा अहिरवार की मृत्यु वर्ष 2013 में हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद याची ने पारिवारिक पेंशन के लिए अनुरोध किया लेकिन बीएसए फ़र्रुखाबाद ने 1989 के शासनादेश को आधार मानते हुए याची के पारिवारिक पेंशन के दावे को अमान्य कर दिया।
कहा गया कि याची 33 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुकी है और शासनादेश के अनुरूप पारिवारिक पेंशन अधिकतम 25 वर्ष आयु या विवाह होने तक मान्य है। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने हसीना बी केस के निर्णय और 2008 एवं 2012 के शासनादेश को आधार मानते हुए बीएसए का आदेश निरस्त कर दिया।
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