बदलते तबादला-समायोजन के नियम से पढ़ाई प्रभावित, हाईकोर्ट, आदेशों में संशोधन व आपत्तियों के बीच उलझी प्रक्रिया, शिक्षक असमंजस में, स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित
लखनऊः प्रदेश में राजकीय माध्यमिक और बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र से ही उलझी हुई है। जून से शुरू हुई प्रक्रिया में आदेशों में संशोधन करना पड़ा। अलग-अलग मामलों में शिक्षक अदालत भी पहुंचे। इससे विभाग को अपने आदेशों में बदलाव करना पड़ा। इसका असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण नीति-2017 के तहत वर्ष 2026-27 के लिए सरप्लस और विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादले किए हैं। विभाग ने 271 सरप्लस शिक्षकों का स्थानांतरण किया है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के भी तबादले किए गए हैं। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग में विशेष परिस्थितियों के आधार पर करीब छह हजार शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। समायोजन को लेकर जारी आदेशों में बदलाव और आपत्तियों के कारण पूरी प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि लगातार बदल रहे आदेशों से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक अब तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी अंतिम तैनाती कहां होगी। कुछ स्कूलों में शिक्षक कार्यमुक्त होने की प्रतीक्षा में हैं, जबकि कई विद्यालयों में नए शिक्षक अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इसका असर नियमित पढ़ाई, कक्षाओं के संचालन और विषयवार शिक्षण पर पड़ रहा है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। यदि आदेश जारी होने के बाद बार-बार संशोधन होंगे और मामले अदालत तक पहुंचेंगे तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का होगा। शिक्षकों का यह भी कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रियाएं शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए। सत्र शुरू होने के बाद लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया से स्कूलों में अनिश्चितता बढ़ती है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है।
दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि शिक्षक संगठनों की आपत्तियों, आरटीई के प्रविधानों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियम सम्मत बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि सभी आपत्तियों का निस्तारण कर जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
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