सहायता प्राप्त विद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को ग्रेच्युटी का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोहराया है कि राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में सेवा दे चुके शिक्षक ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने कहा, अदालत पहले ही यह घोषित कर चुकी है कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत लाभ पाने के हकदार हैं।
गोरखपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं तीन अन्य याचीगण क्रमशः जयनारायण शुक्ला, चंद्राभाई त्रिपाठी व सुरेश कुमार पांडे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सभी याची प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बाचीगण की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने मेहर जहां बनाम उत्तर प्रदेश राज्य केस का हवाला दिया। इस मामले में कोर्ट पहले ही ग्रेच्युटी का लाभ दे दे चुकी है।
राज्य की ओर से कहा गया कि याचिका बेहद देरी से दाखिल की गई है और इसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके जवाब में याचीगण के वकील ने कहा कि ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों में समयसीमा लागू नहीं होती। यह विधिक अधिकार है, भुगतान होने तक मांग की जा सकती है। कहा गया है कि सहायता प्राप्त संस्थान को राज्य सरकार के संस्थानों के समकक्ष माना गया है और सेवा में देरी के आधार पर ग्रेच्युटी के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने को चार सप्ताह का समय दिया है।
No comments:
Write comments